Monday, July 21, 2008

अब छठी गेंद पर काम कर रहा हूँ : अजंता मेंडिस

एशिया कप में बल्लेबाजों को चकमा देकर चर्चा में आए श्रीलंका के रहस्यमयी स्पिनर अजंता मेंडिस ने टेस्ट श्रृंखला से पहले भारतीय बल्लेबाजों को बैकफुट पर भेजने की कवायद शुरू करते हुए खुलासा किया कि अपनी गेंदबाजी में अधिक विविधता लाने के लिए वह एक नई गेंद पर काम कर रहे हैं। मेंडिस ने पत्रकारों से कहा मैं इस खेल (टेस्ट) में नया हूँ। मैं अभी पाँच अलग-अलग तरह की गेंद कर सकता हूँ और अब छठी गेंद पर काम कर रहा हूँ।मेंडिस ने कहा कि वह केवल सही जगह पर गेंदबाजी करने पर ध्यान देते हैं और अपने आदर्श मुथैया मुरलीधरन के साथ मिलकर 23 जुलाई से शुरू होने वाली तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में भारतीय बल्लेबाजों को गेंदबाजी करने को लेकर उत्साहित हैं। इस 23 वर्षीय गेंदबाज ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि मुरली मेरे आदर्श हैं और मैं उनके साथ गेंदबाजी करना चाहता हूँ। यह मेरे लिए शानदार अवसर होगा। मैं सही जगह पर गेंदबाजी करना चाहता हूँ। मेंडिस को अंग्रेजी नहीं आती इसलिए उन्होंने सिंहलीज में अपनी बात कही और श्रीलंका क्रिकेट के अध्यक्ष अर्जुन रणतुंगा ने दुभाषिए की भूमिका निभाई।

आमिर की नायिका बनना है मल्लिका को

आमिर खान की नायिका बनना हर नायिका का सपना रहता है। आमिर बेहद कम फिल्म करते हैं, इसलिए ज्यादातर नायिकाओं को उनके साथ काम करने का अवसर ही नहीं मिल पाता। पिछले दिनों मल्लिका शेरावत से पूछा गया कि बॉलीवुड के वर्तमान नायकों में से किसके साथ काम करने का उनका सपना है, तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया ‘आमिर।‘ फिलहाल तो मल्लिका राहुल बोस और रणवीर शौरी जैसे कलाकारों की नायिका बन रही हैं, जो स्टार नहीं हैं।बड़े स्टार्स ने मल्लिका से दूरी बना रखी है। क्यों? यह खुद मल्लिका को भी नहीं पता। मल्लिका का सपना हकीकत बनेगा या सपना ही रहेगा, इसका जवाब तो बस आमिर जानते हैं।

बॉलीवुड दो फाड़ में


कोई सोच भी नहीं सकता था कि बालीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ की फिल्मी सितारों से भरी जन्मदिन पार्टी में हिंदी सिनेमा के दो सितारों, सलमान खान और शाहरुख खान के झगड़े की वजह से इंडस्ट्री दो खेमों में बंट जाएगी।
प्रेमिका कैटरीना की जन्मदिन पार्टी के दौरान 16 जुलाई को सलमान खान और शाहरुख खान के बीच वाकयुद्ध हो गया, जो बाद में इतना बढ़ गया कि फिल्म इंडस्ट्री ही दो खेमों में बंटी नजर आने लगी।
सूत्रों के अनुसार सलमान ने शाहरुख से कहा कि उनके टेलीविजन क्विज शो दस का दम को शाहरुख के शो क्या आप पांचवीं पास से तेज हैं? से बेहतर टीआरपी मिल रही हैं। सलमान ने शाहरुख से यह भी कहा कि सुपरस्टार होने के बावजूद वे अपने शो को हिट नहीं बना पाए।
इन सारी बातों पर शाहरुख ने तत्काल तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन बाद में उन्होंने सलमान की पूर्व प्रेमिका ऐश्वर्या राय को लेकर उन्हें कुछ फब्तियां कस दीं। पार्टी के दौरान यह सब देर रात हुआ, जब ज्यादातर मेहमान पार्टी छोड़कर जा चुके थे।
आमिर खान ने हालांकि सलमान और शाहरुख के बीच के इस विवाद को सुलझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दोनों में से कोई भी मामले को खत्म करने के इच्छुक नहीं दिखे। दोनों ही कलाकारों के शुभचिंतकों का साथ मिलने से इंडस्ट्री दो खेमों में बंटी नजर आने लगी।
सलमान की पुरानी दोस्त करीना कपूर, अक्षय खन्ना, फरदीन खान और जाएद खान ने उनका साथ दिया। नई पीढ़ी के कलाकारों में से सांवरिया में सलमान के साथ काम कर चुके अभिनेता रणबीर कपूर ने भी खेमेबाजी में सलमान का साथ दिया।
दूसरी ओर, महान निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा और जावेद अख्तर ने शाहरुख को पास बुलाकर मामले को गहराई से जानने की कोशिश की। करण जौहर, साजिद खान और फरहान अख्तर सहित कुणाल कोहली ने भी शाहरुख से सहानुभूति जताई।
जहां अभिनेताओं को सलमान का साथ देते हुए देखा गया, वहीं सभी निर्देशकों ने शाहरुख का साथ दिया। सितारों से भरी कैटरीना कैफ की इस जन्मदिन पार्टी में आमिर खान, करीना कपूर, सैफ अली खान, करण जौहर, राजकुमार संतोषी, कुणाल कोहली, सलीम खान, सोहैल खान, अरबाज खान, निखिल आडवाणी, प्रकाश झा, डेविड धवन, अनीस बज्मी और मनमोहन शेट्टी भी मौजूद थे।

Thursday, July 17, 2008

इंतजार 22 जुलाई का, 'अपनों' से ही खतरा

लेफ्ट पार्टियों की समर्थन वापसी के बाद बहुमत साबित करने को लेकर एक समय आश्वस्त दिख रहा यूपीए अब घबराहट में है। जैसे-जैसे शक्ति परीक्षण की तारीख 22 जुलाई नज़दीक आती जा रही है कांग्रेस के लिए अपने घर से ही मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दूसरी तरफ शिबू सोरेन और अजित सिंह ने भी समर्थन का अब तक कोई आश्वासन नहीं दिया है। दोनों ही क्षत्रप कोई भी वादा करने से पहले नफा-नुकसान का पूरी तरह से आकलन कर लेना चाहते हैं। कांग्रेस की मुश्किल यह है कि वह सरकार बचाने के लिए छोटी-छोटी पार्टियों और निर्दलीयों पर डोरे डाल रही है लेकिन उसके ' घर ' से ही लोग छिटक रहे हैं। भिवानी से कांग्रेस के निलंबित सांसद कुलदीप विश्नोई पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वह किसी भी कीमत पर विश्वास मत के दौरान सरकार के साथ वोट नहीं करेंगे। अब कर्नाटक से भी पार्टी के चार सांसद बीजेपी के संपर्क में हैं और पूरी ' कीमत ' मिलने पर सरकार के खिलाफ वोट कर सकते हैं। ये हैं- चिकबल्लापुर के सांसद आर.एल. जलप्पा , मंड्या के सांसद एम.एच.अंबरीश , कनकपुरा की सांसद तेजस्विनी गौड़ा और कोप्पल से के. वीरूपाकशप्पा। जलप्पा के बेटे और डोडाबल्लापुर से कांग्रेस के विधायक रहे जे. नरसिम्हा स्वामी 10 दिन पहले ही पार्टी और विधानसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। नरसिम्हा स्वामी अब इसी सीट से बीजेपी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। कर्नाटक में पार्टी को गच्चा देने के लिए तैयार बैठे चारों सांसद बीजेपी से अगले लोकसभा चुनाव में टिकट का स्पष्ट आश्वसन चाहते हैं। बीजेपी के लिए अच्छी स्थिति यह है कि इन चारों ही इलाकों में न तो उसका खास जनाधार है और न ही कोई बड़ा नेता। असम के बरपेटा से सांसद ए. एफ. गुलाम उस्मानी के बारे में भी कहा जा रहा है कि वह अंतिम समय में पार्टी को धोखा दे सकते हैं लेकिन उन्होंने साफ किया है कि वह सरकार के पक्ष में ही वोट डालेंगे। उन्होंने एक स्थानीय दैनिक से कहा कि मैं मुख्यमंत्री तरुण गगोई का विरोधी हूं , इसलिए यह बात फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वह 19 तारीख को दिल्ली पहुंच रहे हैं और सोनिया गांधी के सामने अपनी बात रखेंगे। उन्होंने बताया कि उनके पास वीरप्पा मोइली और प्रणव मुखर्जी का फोन आया था और उन्होंने उन्हें आश्वस्त कर दिया है कि वह पार्टी और सरकार के साथ हैं। इस उलझे हुए गणित में जिस आदमी की सबसे ज़्यादा अहमियत है वह हैं पांच सांसदों वाली पार्टी जेएमएम के मुखिया शिबू सोरेन। लिहाज़ा दोनों खेमों से उन्हें अपने पाले में लाए जाने की पुरज़ोर कोशिश चल रही है। सूत्रों के अनुसार यूपीए ने जेएमएम के मुखिया शिबू सोरेन को कोयला मंत्रालय के अलावा उनकी पार्टी के एक और सांसद को राज्यमंत्री बनाने की पेशकश की है। दूसरी तरफ बीजेपी ने उन्हें विश्वास मत के दौरान एनडीए के साथ वोट करने पर झारखंड में मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की है। गौरतलब है कि झारखंड में एनडीए के 35 और जेएमएम के 17 विधायक हैं। जबकि सरकार बनाने के लिए 41 विधायक ही चाहिए। साफ है कि शिबू सोरेन के दोनों हाथों में लड्डू हैं और वह कोई भी फैसला करने से पहले स्थिति का आकलन कर लेना चाहते हैं। सोरेन के मन में यह बात चल रही होगी कि अगर उनकी पार्टी के वोटों के बाद भी यूपीए सरकार विश्वास मत में हार गई तो उन्हें कुछ भी नहीं मिलेगा। सोरेन 18 जुलाई को दिल्ली पहुंच रहे हैं और उसके बाद ही कोई फैसला लेंगे। आरएलडी के तीन सांसदों के समर्थन के लिए कांग्रेस ने अजित सिंह के सामने लखनऊ के अमौसी एअरपोर्ट का नाम बदलकर स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है , पर इससे भी उनका दिल नहीं पसीजा है। अजित सिंह ने गुरुवार को कहा , ' विश्वास प्रस्ताव की स्थिति परमाणु करार को लेकर ज़रूर बनी , लेकिन आज इसका स्थान आने वाले चुनाव ने ले लिया है। हम इन सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद कोई फैसला करेंगे। ' साफ है कि छोटे चौधरी के दिमाग में अगला लोकसभा चुनाव है और वह कोई भी फैसला इसी आधार पर करेंगे। सरकार बचाने के लिए कांग्रेस की उम्मीदें अब भी वीरेंद्र कुमार को छोड़कर जेडी (एस) के 2 , नैशनल कॉन्फ्रंस के 2 के अलावा एक-एक सदस्यों वाली तृणमूल कांग्रेस , मिजो नैशनल फ्रंट , नगालैंड पीपल्स फ्रंट , एआईएमआईएम और 4 निर्दलीय सांसदों पर टिकी हैं। इन तमाम आकलनों के बावजूद 22 जुलाई को जब सस्पेंस पर से पर्दा उठेगा तो चौंकाना वाला नतीजा सामने आ सकता है। क्योंकि किसी का कोई पाला बदलेगा तो कोई वोट के वक्त गैरहाज़िर होगा। न केवल सांसद बल्कि पार्टियां भी अंतिम समय में पाला बदल सकती हैं।